Thursday, August 8, 2013
Thursday, June 13, 2013
Friday, May 17, 2013
कहाँ तक जायज है भाजपा का आन्दोलन !!!
कहाँ तक जायज है भाजपा का आन्दोलन !!!
जयप्रकाश माली
सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ के मामले में भाजपा के कद्दावर नेता गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ केंद्रीय अन्वेक्षण ब्यूरो (सी बी आई) द्वारा हत्या के षड्यंत्र कर्ता के रूप में आरोपी बनाये जाने के विरोध में भाजपा शनिवार को राजस्थान बंद करवाएगी lकटारिया की गिरफ्तारी को रोकने के लिए एक राजनेतिक पार्टी का उग्र विरोध और राजस्थान बंद चिंता का विषय है , सी बी आई द्वारा घोषित एक हत्या के आरोपी के बचाव में बंद को जिस तरह से पार्टी समर्थन दे रही है, उससे तो लग रहा हे दाल में कुछ काला जरुर है l क्या दबाव डालकर किसी आरोपी को छुडवा देना भारत के सविंधान के खिलाफ मुखालत करना नहीं है ,राजस्थान में कुछ ही महीनों बाद में चुनाव है इसे देखते हुए किसी पार्टी के अपने सांत्वना के वोटो को बटोरने के कई तरीके हो सकते है लेकिन किसी हत्या के आरोपी (सी बी आई) द्वारा घोषित को इस तरह से बचाना कहाँ तक जायज है l
जयप्रकाश माली
सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ के मामले में भाजपा के कद्दावर नेता गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ केंद्रीय अन्वेक्षण ब्यूरो (सी बी आई) द्वारा हत्या के षड्यंत्र कर्ता के रूप में आरोपी बनाये जाने के विरोध में भाजपा शनिवार को राजस्थान बंद करवाएगी lकटारिया की गिरफ्तारी को रोकने के लिए एक राजनेतिक पार्टी का उग्र विरोध और राजस्थान बंद चिंता का विषय है , सी बी आई द्वारा घोषित एक हत्या के आरोपी के बचाव में बंद को जिस तरह से पार्टी समर्थन दे रही है, उससे तो लग रहा हे दाल में कुछ काला जरुर है l क्या दबाव डालकर किसी आरोपी को छुडवा देना भारत के सविंधान के खिलाफ मुखालत करना नहीं है ,राजस्थान में कुछ ही महीनों बाद में चुनाव है इसे देखते हुए किसी पार्टी के अपने सांत्वना के वोटो को बटोरने के कई तरीके हो सकते है लेकिन किसी हत्या के आरोपी (सी बी आई) द्वारा घोषित को इस तरह से बचाना कहाँ तक जायज है l
Thursday, May 2, 2013
Wednesday, May 1, 2013
Thursday, April 11, 2013
आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
मरुदेश में चुनावी बिगुल बज चूका है l भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने अपने तरकश में तीर भर के एक दुसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे है l दोनों ही पार्टिया राज्य के विकास में योगदान के लिए अपने अपने दावे ठोक रही है l लेकिन हकीकत उससे हट के है , पिछले साठ सालो में किसने क्या किया यह तो पता नहीं लेकिन विकास कितना हुआ उसी पर एक छोटा सा उदाहरण आपके सामने रख रहा हूँ l
आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
उदयपुर संभाग मुख्यालय से पचास किमी दूर पंचायत समिति सराड़ा के सत्रह सौ लोगों की आबादी वाले कड़ी मगरी गांव में आजादी के बाद से अब तक महज एक बच्चा बारहवीं पास कर पाया है और तीन बच्चों ने दसवीं की परिक्षा पास की है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीण बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते, लेकिन पांचवीं से आगे की पढ़ाई की आसपास के सात किमी. में व्यवस्था नहीं होने के कारण ये हालात बने हैं। गांव में 22 साल से 5वीं तक का स्कूल है। ग्रामीण पिछले 16 सालों से इसे क्रमोन्नत कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सारे प्रयास बेनतीजा साबित हुए। 10वीं तक का स्कूल करीब सात किमी दूर सल्लाड़ा पंचायत मुख्यालय पर है और वहां तक पहुंचने का तीन किमी का रास्ता दुर्गम है। मार्ग में कंटीली झाड़ियां होने के कारण केवल पैदल ही चला जा सकता है। इसी मजबूरी के चलते बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। कुछ बच्चों ने जैसे-तैसे छठी तथा आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और बाद में पढ़ाई अधूरी छोड़कर कमाने में जुट गए।
मरुदेश में चुनावी बिगुल बज चूका है l भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने अपने तरकश में तीर भर के एक दुसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे है l दोनों ही पार्टिया राज्य के विकास में योगदान के लिए अपने अपने दावे ठोक रही है l लेकिन हकीकत उससे हट के है , पिछले साठ सालो में किसने क्या किया यह तो पता नहीं लेकिन विकास कितना हुआ उसी पर एक छोटा सा उदाहरण आपके सामने रख रहा हूँ l
आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
उदयपुर संभाग मुख्यालय से पचास किमी दूर पंचायत समिति सराड़ा के सत्रह सौ लोगों की आबादी वाले कड़ी मगरी गांव में आजादी के बाद से अब तक महज एक बच्चा बारहवीं पास कर पाया है और तीन बच्चों ने दसवीं की परिक्षा पास की है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीण बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते, लेकिन पांचवीं से आगे की पढ़ाई की आसपास के सात किमी. में व्यवस्था नहीं होने के कारण ये हालात बने हैं। गांव में 22 साल से 5वीं तक का स्कूल है। ग्रामीण पिछले 16 सालों से इसे क्रमोन्नत कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सारे प्रयास बेनतीजा साबित हुए। 10वीं तक का स्कूल करीब सात किमी दूर सल्लाड़ा पंचायत मुख्यालय पर है और वहां तक पहुंचने का तीन किमी का रास्ता दुर्गम है। मार्ग में कंटीली झाड़ियां होने के कारण केवल पैदल ही चला जा सकता है। इसी मजबूरी के चलते बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। कुछ बच्चों ने जैसे-तैसे छठी तथा आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और बाद में पढ़ाई अधूरी छोड़कर कमाने में जुट गए।
Friday, April 5, 2013
Thursday, April 4, 2013
बीजेपी के बिखराव में तस्वीर तलाशती वसुंधरा
वसुंधरा राजे सुराज यात्रा लेकर निकली हैं। तेवर बहुत आक्रामक हैं। लेकिन सीएम अशोक गहलोत एकदम सहज। सहज इसलिए भी क्योंकि गहलोत आमतौर पर नकली नहीं हो पाते। वैसे तो राजनीति में आश्वस्त भाव किसी में भी किसी भी स्तर पर नहीं होता। लेकिन गहलोत के लिए इन दिनों सहज रहने की एक वजह यह भी है कि राजस्थान में यह मान्यता बनती जा रही है कि वसुंधरा और उनकी बीजेपी कोई बहुत बड़ा तीर नहीं मार पाएगी। बीजेपी के बाकी नेताओं की की मजबूरी यह है कि वे मन से वसुंधरा का साथ नहीं दे सकते और वसुंधरा किसी भी तरह की राजनीतिक मजबूरी निभाने में बहुत विश्वास नहीं करती। वसुंधरा समर्थक इसी को उनकी ताकत भी मानते हैं, पर मामला जब सरकार को हटाकर सरकार में आने का हो तो ताकतें अकसर दगा भी दे जाती हैं। गहलोत इसीलिए आश्वस्त हैं।
वसुंधरा राजे की चाल कोई धीमी नहीं है। अभी तो चुनाव में कम से कम छह महीने हैं, और अभी से वे बहुत तेज चल रही है। राजनीति कहती है कि स्पीड ऐसी ही रही तो चुनाव आते आते उनके सारे हाथी घोड़े थक जाएंगे। हालांकि वे इसलिए अचानक बहुत सक्रिय हो गई है कि उनको लग रहा है कि चुनाव आते आते वे बीजेपी के अंदरूनी झमेले सुलझा लेंगी। चुनाव के वक्त तक कौन साथ है, कौन नहीं, कौन ताकतवर हैं और कौन कमजोर, इसका भी पता चल जाएगा। लेकिन राजनीति में आम तौर पर जो दिखता है वह होता नहीं और जो होना होता है वह कई बार तो होने के बाद भी कईयों को तो पता तक नहीं चलता। प्रदेश में बीजेपी की अंदरूनी हालत असल में कैसी है, इसमें जाना बेमानी हैं।
वसुंधरा के ग्लैमर, गहलोत के जादू और आज के हालात की बात की जाए, तो दोनों के बीच नकली और असली दोनों का भेद एकदम साफ है। गहलोत और वसुंधरा में से कौन असली और कौन नकली हैं, यह कमसे कम राजस्थान में तो किसी से भी पूछने की जरूरत नहीं हैं। फिर भी वसुंधरा राजे अपने ग्लैमर से लोगों को लुभा रही है तो गहलोत सादगी और संवेदनशील नेता के रूप में भलमनसाहत वाली अपनी पुरानी छाप को कायम रखे हुए हैं। इस सबके बीच वसुंधरा राजे की आधुनिक किस्म की आक्रामकता और गहलोत की पारंपरिक सदाशयता को समझने के मामले में राजस्थान की जनता कोई बहुत उलझन में नहीं है। लटके झटके के पीछे की लालसा लोग समझ रहे है और सादगी के पीछे का सच भी। हालांकि यह पहला मौका है जब राजस्थान की राजनीति में किसी सत्तासीन सरकार की आसन्न विदाई की अवधारणा ने अचानक यू टर्न ले लिया हो। लोगों को समझ में आ रहा है कि गहलोत सरकार के बारे में जो उल्टी गिनती कुछ महीनों पहले शुरू हुई मानी जा रही थी, वह अचानक रुकी ही नहीं, यू टर्न ले चुकी है।
साढ़े चार साल पहले गहलोत जब प्रदेश के दूसरी बार सीएम बने थे, तो वह कोई कांग्रेस का कमाल नहीं बल्कि गहलोत का जादू और उनकी भलमनसाहत का करिश्मा था। उधार के आधार पर बनी गहलोत की सरकार को पहले दिन से ही अब गई - तब गई की तरह से देखा जाता रहा। फिर जिस सरकार का विपरीत भविष्य उसके बनने से पहले ही लिखा जा चुका हो, वह आज विपक्ष से बिल्कुल बराबरी का मुकाबला कर रही हो, तो उसके पीछे गहलोत की राजनीतिक सोच का जादू ही माना जा सकता है। गहलोत की काबिलियत का जलवा यह भी है कि उन्होंने अपनी कोशिशों से एक लाचार, बेबस और एक कमजोर सरकार को मजबूत शख्ल बख्श कर बीजेपी और वसुंधरा से अपने मुकाबले के बारे में लोगों की धारणा ही बदल दी है। सीएम के तौर पर दूसरे दौर के दसवें साल में गहलोत अपने राजनीतिक जीवन का सबसे शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। पर उधर, वसुंधरा राजे बीजेपी के बिखराव में अपनी तस्वीर तलाशती नजर आ रही है। लेकिन तस्वीरों की तासीर यही है कि बिखराव के बियाबान में वे अकसर बरबाद हालत में ही मिला करती है, इसका क्या किया जाए!
निरंजन परिहार
भारत की विज्ञापन पत्रकारिता - जयप्रकाश माली
दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में मीडिया एक बहुत बड़ी ताकत है । न केवल प्रिंट मीडिया बल्कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी बहुत ताकतवर है मीडिया यहाँ कुछ भी कर सकता है । पत्रकार लोग कुछ भी कर सकते है लेकिन अभी भी मीडिया में काफी खामिया और कमजोरिया है । जिन्हें मीडिया नजरंदाज करता है सबसे पहले इलेक्ट्रोनिक मीडिया के बारे में - हम लोगों को मीडिया से हमेशा ताजा खबरें और बहुत कुछ अलग से देखने को मिलता है। अभी अपने देश में इतने न्यूज़ चैनल होगे के हमे खुद को भी उनके बारे में नहीं पता उनमें से कुछ चैनल तो भारत से है और कुछ चैनल भारत से बाहर से है । मीडिया हमेशा नैतिकता और देशभक्ति की बातें करता है लेकिन काफी टाइम वो खुद उन सबको भूल जाता है । अभी कुछ समय पहले मुंबई पर आतंकवादी हमले हुए यह हमला न केवल मुंबई पर था बल्कि पूरे महाराष्ट्र और पूरे देश पर था हर एक भारतीय चाहे वो भारत में हो या विदेश में इस खबर को सुनकर सदमे में था । उस समय प्रत्येक न्यूज़ चैनल उस घटना का सीधा प्रसारण कर रहा था और सभी लोग उसे देख रहे थे उस समय भी मीडिया ने अपनी व्यावसायिकता की होड़ और विज्ञापनों वाले नजरिये को नहीं छोड़ा था । हम सभी लोग अपने देश और देशवासियों के लिए चिंतित और डरे हुए थे हम सभी लोग टीवी पर घटना का सीधा प्रसारण देख रहे थे। उसी बीच में एक विज्ञापन आता है के यह आराम का मामला है अपुन की चोइस का मामला है यह् बहुत गलत और बहुत ही शर्मनाक बात है। यह .हम सभी मानते है के व्यावसायिकता आज के जमाने में जरूरी है लेकिन जब मामला अपने देश का हो तो हमे कुछ कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना चाहिए उस समय काफी भारतीय अपने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार थे और काफी लोगों ने ऐसा किया भी लेकिन हमारा मीडिया वो अपने विज्ञापन छोडने के लिए भी तैयार नहीं था उन्होंने पूरे समय अपने विज्ञापन जारी रखे । जब अमेरिका में आतंकी हमला हुआ था तो वहां पर भी सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा था लेकिन उस समय वहां वह पर मीडिया ने विज्ञापन नहीं दिखाए थे वहां के मीडिया ने अपने देश के लिए अपने विज्ञापन समय की कुर्बानी दे दी थी लेकिन भारतीय मीडिया ने ऐसा नहीं किया हमारे मीडिया को उनसे कुछ सीखना चाहिए हम दूसरे देशो से हमेशा प्रतियोगिता करते रहते है लेकिन ऐसे मामलों में हम सभी हार क्यों जाते है ? हमको यह नहीं पता के कौन स्थानीय लोग इस साजिश के पीछे जिम्मेदार थे क्योंकी इस प्रकार की गतिविधियाँ बिना किसी स्थानीय मदद के पूरी नहीं की जा सकती है न तो कोई पत्रकार और न ही मीडिया इस बारे में बोलता है ।
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