आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
मरुदेश में चुनावी बिगुल बज चूका है l भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने अपने तरकश में तीर भर के एक दुसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे है l दोनों ही पार्टिया राज्य के विकास में योगदान के लिए अपने अपने दावे ठोक रही है l लेकिन हकीकत उससे हट के है , पिछले साठ सालो में किसने क्या किया यह तो पता नहीं लेकिन विकास कितना हुआ उसी पर एक छोटा सा उदाहरण आपके सामने रख रहा हूँ l
आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
उदयपुर संभाग मुख्यालय से पचास किमी दूर पंचायत समिति सराड़ा के सत्रह सौ लोगों की आबादी वाले कड़ी मगरी गांव में आजादी के बाद से अब तक महज एक बच्चा बारहवीं पास कर पाया है और तीन बच्चों ने दसवीं की परिक्षा पास की है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीण बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते, लेकिन पांचवीं से आगे की पढ़ाई की आसपास के सात किमी. में व्यवस्था नहीं होने के कारण ये हालात बने हैं। गांव में 22 साल से 5वीं तक का स्कूल है। ग्रामीण पिछले 16 सालों से इसे क्रमोन्नत कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सारे प्रयास बेनतीजा साबित हुए। 10वीं तक का स्कूल करीब सात किमी दूर सल्लाड़ा पंचायत मुख्यालय पर है और वहां तक पहुंचने का तीन किमी का रास्ता दुर्गम है। मार्ग में कंटीली झाड़ियां होने के कारण केवल पैदल ही चला जा सकता है। इसी मजबूरी के चलते बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। कुछ बच्चों ने जैसे-तैसे छठी तथा आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और बाद में पढ़ाई अधूरी छोड़कर कमाने में जुट गए।
मरुदेश में चुनावी बिगुल बज चूका है l भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने अपने तरकश में तीर भर के एक दुसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे है l दोनों ही पार्टिया राज्य के विकास में योगदान के लिए अपने अपने दावे ठोक रही है l लेकिन हकीकत उससे हट के है , पिछले साठ सालो में किसने क्या किया यह तो पता नहीं लेकिन विकास कितना हुआ उसी पर एक छोटा सा उदाहरण आपके सामने रख रहा हूँ l
आजादी से आज तक एक छोरा 12वीं पास हुआ
उदयपुर संभाग मुख्यालय से पचास किमी दूर पंचायत समिति सराड़ा के सत्रह सौ लोगों की आबादी वाले कड़ी मगरी गांव में आजादी के बाद से अब तक महज एक बच्चा बारहवीं पास कर पाया है और तीन बच्चों ने दसवीं की परिक्षा पास की है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीण बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते, लेकिन पांचवीं से आगे की पढ़ाई की आसपास के सात किमी. में व्यवस्था नहीं होने के कारण ये हालात बने हैं। गांव में 22 साल से 5वीं तक का स्कूल है। ग्रामीण पिछले 16 सालों से इसे क्रमोन्नत कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सारे प्रयास बेनतीजा साबित हुए। 10वीं तक का स्कूल करीब सात किमी दूर सल्लाड़ा पंचायत मुख्यालय पर है और वहां तक पहुंचने का तीन किमी का रास्ता दुर्गम है। मार्ग में कंटीली झाड़ियां होने के कारण केवल पैदल ही चला जा सकता है। इसी मजबूरी के चलते बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। कुछ बच्चों ने जैसे-तैसे छठी तथा आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और बाद में पढ़ाई अधूरी छोड़कर कमाने में जुट गए।

