दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में मीडिया एक बहुत बड़ी ताकत है । न केवल प्रिंट मीडिया बल्कि इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी बहुत ताकतवर है मीडिया यहाँ कुछ भी कर सकता है । पत्रकार लोग कुछ भी कर सकते है लेकिन अभी भी मीडिया में काफी खामिया और कमजोरिया है । जिन्हें मीडिया नजरंदाज करता है सबसे पहले इलेक्ट्रोनिक मीडिया के बारे में - हम लोगों को मीडिया से हमेशा ताजा खबरें और बहुत कुछ अलग से देखने को मिलता है। अभी अपने देश में इतने न्यूज़ चैनल होगे के हमे खुद को भी उनके बारे में नहीं पता उनमें से कुछ चैनल तो भारत से है और कुछ चैनल भारत से बाहर से है । मीडिया हमेशा नैतिकता और देशभक्ति की बातें करता है लेकिन काफी टाइम वो खुद उन सबको भूल जाता है । अभी कुछ समय पहले मुंबई पर आतंकवादी हमले हुए यह हमला न केवल मुंबई पर था बल्कि पूरे महाराष्ट्र और पूरे देश पर था हर एक भारतीय चाहे वो भारत में हो या विदेश में इस खबर को सुनकर सदमे में था । उस समय प्रत्येक न्यूज़ चैनल उस घटना का सीधा प्रसारण कर रहा था और सभी लोग उसे देख रहे थे उस समय भी मीडिया ने अपनी व्यावसायिकता की होड़ और विज्ञापनों वाले नजरिये को नहीं छोड़ा था । हम सभी लोग अपने देश और देशवासियों के लिए चिंतित और डरे हुए थे हम सभी लोग टीवी पर घटना का सीधा प्रसारण देख रहे थे। उसी बीच में एक विज्ञापन आता है के यह आराम का मामला है अपुन की चोइस का मामला है यह् बहुत गलत और बहुत ही शर्मनाक बात है। यह .हम सभी मानते है के व्यावसायिकता आज के जमाने में जरूरी है लेकिन जब मामला अपने देश का हो तो हमे कुछ कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना चाहिए उस समय काफी भारतीय अपने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार थे और काफी लोगों ने ऐसा किया भी लेकिन हमारा मीडिया वो अपने विज्ञापन छोडने के लिए भी तैयार नहीं था उन्होंने पूरे समय अपने विज्ञापन जारी रखे । जब अमेरिका में आतंकी हमला हुआ था तो वहां पर भी सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा था लेकिन उस समय वहां वह पर मीडिया ने विज्ञापन नहीं दिखाए थे वहां के मीडिया ने अपने देश के लिए अपने विज्ञापन समय की कुर्बानी दे दी थी लेकिन भारतीय मीडिया ने ऐसा नहीं किया हमारे मीडिया को उनसे कुछ सीखना चाहिए हम दूसरे देशो से हमेशा प्रतियोगिता करते रहते है लेकिन ऐसे मामलों में हम सभी हार क्यों जाते है ? हमको यह नहीं पता के कौन स्थानीय लोग इस साजिश के पीछे जिम्मेदार थे क्योंकी इस प्रकार की गतिविधियाँ बिना किसी स्थानीय मदद के पूरी नहीं की जा सकती है न तो कोई पत्रकार और न ही मीडिया इस बारे में बोलता है ।
|
Thursday, April 4, 2013
भारत की विज्ञापन पत्रकारिता - जयप्रकाश माली
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment