कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर सो बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में सहसा भरता है
चढ़ कर गिरना गिर कर चढ़ना न अखरता है
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
डूबकियां सिन्धु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौट वह आता है
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दूना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी खाली उसकी हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
असफलता एक चुनोती है स्वीकार करो
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो
जब तक न सफल नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्षो का मैदान छोड़ न भागो तुम
कुछ किए बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता
कोई सह लेता है कोई कह लेता है क्यूँकी ग़म
कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता
आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता
क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता
कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र
नही होता
No comments:
Post a Comment